झारखण्ड में सत्ता की चाबी सोरेन के हाथ
रांची। झारखण्ड विधानसभा चुनाव में भाजपा-जदयू गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा है, तो कांग्रेस गठबंधन भी 16 सीटों की बढ़त के बावजूद बहुमत के लिए जरूरी 41 सीटों का आंकड़ा नहीं छू सका। खण्डित जनादेश का सबसे बड़ा फायदा हुआ है गुरूजी यानी शिबू सोरेन को, जो अब मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए जोड़-तोड़ बिठाने में जुटे हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के झारखण्ड विकास मोर्चा और कांग्रेस के गठबंधन को 25, जबकि भाजपा और जनतादल (यू) गठजोड़ को 20 सीटें मिली हैं। राष्ट्रीय जनता दल को पांच सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। अन्य दलों के खाते में 13 सीटें आई हैं। अकेले चुनाव लड़ने वाले सोरेन के झामुमो की झोली में 18 सीटें आईं। मतलब जादुई आंकड़े के लिए सोरेन का साथ जरूरी होगा।


परिणाम अपेक्षा के विपरीत
दूसरी तरफ, चुनाव परिणामों को अपेक्षा के विपरीत बताते हुए भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि पार्टी के हित और हक में यही होगा कि वह बेहतर स्थायित्व वाली विकासोन्मुखी सरकार बनाए। जदयू के अध्यक्ष शरद यादव ने अपनी पार्टी की हार स्वीकार करते हुए कहा कि उनकी पार्टी किसी भी दल का समर्थन नहीं करेगी और विपक्ष में बैठना पसंद करेगी।

यह धर्मनिरपेक्ष ताकतों की जीत है। मुख्यमंत्री के पद के बारे में फैसला कांग्र्रेस हाईकमान ही लेगा।
- सुबोधकांत सहाय, केन्द्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री पद के दावेदार


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